सभोपदेशक 4:8
ज्ञात 0/35
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有人孤单无二,无子无兄,竟劳碌不息,眼目也不以钱财为足。他说:「我劳劳碌碌,刻苦自己,不享福乐,到底是为谁呢?」这也是虚空,是极重的劳苦。
yǒu rén gū dān wú èr , wú zǐ wú xiōng , jìng láo lù bù xī , yǎn mù yě bù yǐ qián cái wèi zú 。 tā shuō :「 wǒ láo láo lù lù , kè kǔ zì jǐ , bù xiǎng fú lè , dào dǐ shì wèi shuí ne ?」 zhè yě shì xū kōng , shì jí zhòng de láo kǔ 。
कोई अकेला रहता और उसका कोई नहीं है; न उसके बेटा है, न भाई है, तो भी उसके परिश्रम का अन्त नहीं होता; न उसकी आँखें धन से सन्तुष्ट होती हैं, और न वह कहता है, मैं किसके लिये परिश्रम करता और अपने जीवन को सुखरहित रखता हूँ? यह भी व्यर्थ और निरा दुःख भरा काम है।