中文圣经

सभोपदेशक 6

ज्ञात 0/154

wǒ jiàn rì guāng zhī xià yǒu yì zōng huò huàn zhòng yā zài rén shēn shàng ,

एक बुराई जो मैंने सूर्य के नीचे देखी है, वह मनुष्यों को बहुत भारी लगती है:

使

jiù shì rén méng shén cì tā zī cái 、 fēng fù 、 zūn róng , yǐ zhì tā xīn lǐ suǒ yuàn de yí yàng dōu bù quē , zhǐ shì shén shǐ tā bù néng chī yòng , fǎn yǒu wài rén lái chī yòng 。 zhè shì xū kōng , yě shì huò huàn 。

किसी मनुष्य को परमेश्वर धन-सम्पत्ति और प्रतिष्ठा यहाँ तक देता है कि जो कुछ उसका मन चाहता है उसे उसकी कुछ भी घटी नहीं होती, तो भी परमेश्वर उसको उसमें से खाने नहीं देता, कोई दूसरा ही उसे खाता है; यह व्यर्थ और भयानक दुःख है।

rén ruò shēng yì bǎi gè ér zi , huó xǔ duō suì shù , yǐ zhì tā de nián rì shèn duō , xīn lǐ què bù dé mǎn xiǎng fú lè , yòu bù dé mái zàng ; jù wǒ shuō , nà bú dào qī ér luò de tāi bǐ tā dǎo hǎo 。

यदि किसी पुरुष के सौ पुत्र हों, और वह बहुत वर्ष जीवित रहे और उसकी आयु बढ़ जाए, परन्तु न उसका प्राण प्रसन्न रहे और न उसकी अन्तिम क्रिया की जाए6:3 न उसकी अन्तिम क्रिया की जाए: शव को दफन किए बिना छोड़ देना कलंक और अपमान की बात होती थी।, तो मैं कहता हूँ कि ऐसे मनुष्य से अधूरे समय का जन्मा हुआ बच्चा उत्तम है।

yīn wèi xū xū ér lái , àn àn ér qù , míng zì bèi hēi àn zhē bì ,

क्योंकि वह व्यर्थ ही आया और अंधेरे में चला गया, और उसका नाम भी अंधेरे में छिप गया;

bìng qiě méi yǒu jiàn guò tiān rì , yě háo wú zhī jué ; zhè tāi , bǐ nà rén dǎo xiǎng ān xī 。

और न सूर्य को देखा, न किसी चीज को जानने पाया; तो भी इसको उस मनुष्य से अधिक चैन मिला।

nà rén suī rán huó qiān nián , zài huó qiān nián , què bù xiǎng fú , zhòng rén qǐ bù dōu guī yī gè dì fāng qù ma ?

हाँ चाहे वह दो हजार वर्ष जीवित रहे, और कुछ सुख भोगने न पाए, तो उसे क्या? क्या सब के सब एक ही स्थान में नहीं जाते?

rén de láo lù dōu wèi kǒu fù , xīn lǐ què bù zhī zú 。

मनुष्य का सारा परिश्रम उसके पेट के लिये होता है तो भी उसका मन नहीं भरता।

zhè yàng kàn lái , zhì huì rén bǐ yú mèi rén yǒu shén me cháng chù ne ? qióng rén zài zhòng rén miàn qián zhī dào rú hé xíng , yǒu shén me cháng chù ne ?

जो बुद्धिमान है वह मूर्ख से किस बात में बढ़कर है? और कंगाल जो यह जानता है कि इस जीवन में किस प्रकार से चलना चाहिये6:8 किस प्रकार से चलना चाहिये: अर्थात् उसके साथ के मनुष्यों के साथ कैसा आचरण रखना चाहिए।, वह भी उससे किस बात में बढ़कर है?

yǎn jīng suǒ kàn de bǐ xīn lǐ wàng xiǎng de dǎo hǎo 。 zhè yě shì xū kōng , yě shì bǔ fēng 。

आँखों से देख लेना मन की चंचलता से उत्तम है: यह भी व्यर्थ और वायु को पकड़ना है।

xiān qián suǒ yǒu de , zǎo yǐ qǐ le míng , bìng zhī dào hé wèi rén , tā yě bù néng yǔ nà bǐ zì jǐ lì dà de xiāng zhēng 。

जो कुछ हुआ है उसका नाम युग के आरम्भ से रखा गया है, और यह प्रगट है कि वह आदमी है, कि वह उससे जो उससे अधिक शक्तिमान है झगड़ा नहीं कर सकता है।

jiā zēng xū fú de shì jì duō , zhè yǔ rén yǒu shén me yì chù ne ?

बहुत सी ऐसी बातें हैं जिनके कारण जीवन और भी व्यर्थ होता है तो फिर मनुष्य को क्या लाभ?

rén yì shēng xū dù de rì zi , jiù rú yǐng ér jīng guò , shuí zhī dào shén me yǔ tā yǒu yì ne ? shuí néng gào sù tā shēn hòu zài rì guāng zhī xià yǒu shén me shì ne ?

क्योंकि मनुष्य के क्षणिक व्यर्थ जीवन में जो वह परछाई के समान बिताता है कौन जानता है कि उसके लिये अच्छा क्या है? क्योंकि मनुष्य को कौन बता सकता है कि उसके बाद सूर्य के नीचे क्या होगा?

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