中文圣经

अय्यूब 14

ज्ञात 0/206

rén wéi fù rén suǒ shēng , rì zi duǎn shǎo , duō yǒu huàn nàn ;

“मनुष्य जो स्त्री से उत्पन्न होता है14:1 मनुष्य जो स्त्री से उत्पन्न होता है: इन पदों में अय्यूब का उद्देश्य है कि वह मनुष्य की दुर्बलता और क्षणभंगुरता को दर्शाए।, उसके दिन थोड़े और दुःख भरे है।

chū lái rú huā , yòu bèi gē xià , fēi qù rú yǐng , bù néng cún liú 。

वह फूल के समान खिलता, फिर तोड़ा जाता है; वह छाया की रीति पर ढल जाता, और कहीं ठहरता नहीं।

zhè yàng de rén nǐ qǐ zhēng yǎn kàn tā ma ? yòu jiào wǒ lái shòu shěn ma ?

फिर क्या तू ऐसे पर दृष्टि लगाता है? क्या तू मुझे अपने साथ कचहरी में घसीटता है?

使

shuí néng shǐ jié jìng zhī wù chū yú wū huì zhī zhōng ne ? wú lùn shuí yě bù néng !

अशुद्ध वस्तु से शुद्ध वस्तु को कौन निकाल सकता है? कोई नहीं।

使

rén de rì zi jì rán xiàn dìng , tā de yuè shù zài nǐ nà lǐ , nǐ yě pài dìng tā de jiè xiàn , shǐ tā bù néng yuè guò ,

मनुष्य के दिन नियुक्त किए गए हैं, और उसके महीनों की गिनती तेरे पास लिखी है, और तूने उसके लिये ऐसा सीमा बाँधा है जिसे वह पार नहीं कर सकता,

便使

biàn qiú nǐ zhuǎn yǎn bú kàn tā , shǐ tā dé xiē xī , zhí děng tā xiàng gù gōng rén wán bì tā de rì zi 。

इस कारण उससे अपना मुँह फेर ले, कि वह आराम करे, जब तक कि वह मजदूर के समान अपना दिन पूरा न कर ले।

shù ruò bèi kǎn xià , hái kě zhǐ wàng fā yá , nèn zhī shēng zhǎng bù xī ;

“वृक्ष के लिये तो आशा रहती है, कि चाहे वह काट डाला भी जाए, तो भी फिर पनपेगा और उससे नर्म-नर्म डालियाँ निकलती ही रहेंगी।

qí gēn suī rán shuāi lǎo zài dì lǐ , gān yě sǐ zài tǔ zhōng ,

चाहे उसकी जड़ भूमि में पुरानी भी हो जाए, और उसका ठूँठ मिट्टी में सूख भी जाए,

jí zhì dé le shuǐ qì , hái yào fā yá , yòu cháng zhī tiáo , xiàng xīn zāi de shù yí yàng 。

तो भी वर्षा की गन्ध पाकर वह फिर पनपेगा, और पौधे के समान उससे शाखाएँ फूटेंगी।

dàn rén sǐ wáng ér xiāo miè ; tā qì jué , jìng zài hé chù ne ?

परन्तु मनुष्य मर जाता, और पड़ा रहता है; जब उसका प्राण छूट गया, तब वह कहाँ रहा?

hǎi zhōng de shuǐ jué jìn , jiāng hé xiāo sàn gān hé 。

जैसे नदी का जल घट जाता है, और जैसे महानद का जल सूखते-सूखते सूख जाता है14:11 जैसे महानद का जल सूखते-सूखते सूख जाता है: जैसे पानी भाप बनकर उड़ जाता है और तल सूख जाता है वैसे ही मनुष्य है जो पूर्णतः लोप हो जाता है और कुछ छोड़कर नहीं जाता है।,

rén yě shì rú cǐ , tǎng xià bú zài qǐ lái , děng dào tiān méi yǒu le , réng bù dé fù xǐng , yě bù dé cóng shuì zhōng huàn xǐng 。

वैसे ही मनुष्य लेट जाता और फिर नहीं उठता; जब तक आकाश बना रहेगा तब तक वह न जागेगा, और न उसकी नींद टूटेगी।

忿

wéi yuàn nǐ bǎ wǒ cáng zài yīn jiān , cún yú yǐn mì chù , děng nǐ de fèn nù guò qù ; yuàn nǐ wèi wǒ dìng le rì qī , jì niàn wǒ 。

भला होता कि तू मुझे अधोलोक में छिपा लेता, और जब तक तेरा कोप ठंडा न हो जाए तब तक मुझे छिपाए रखता, और मेरे लिये समय नियुक्त करके फिर मेरी सुधि लेता।

rén ruò sǐ le qǐ néng zài huó ne ? wǒ zhǐ yào zài wǒ yí qiè zhēng zhàn de rì zi , děng wǒ bèi shì fàng de shí hòu lái dào 。

यदि मनुष्य मर जाए तो क्या वह फिर जीवित होगा? जब तक मेरा छुटकारा न होता तब तक मैं अपनी कठिन सेवा के सारे दिन आशा लगाए रहता।

便

nǐ hū jiào , wǒ biàn huí dá ; nǐ shǒu suǒ zuò de , nǐ bì xiàn mù 。

तू मुझे पुकारता, और मैं उत्तर देता हूँ; तुझे अपने हाथ के बनाए हुए काम की अभिलाषा होती है।

dàn rú jīn nǐ shù diǎn wǒ de jiǎo bù , qǐ bù kuī chá wǒ de zuì guo ma ?

परन्तु अब तू मेरे पग-पग को गिनता है, क्या तू मेरे पाप की ताक में लगा नहीं रहता?

wǒ de guò fàn bèi nǐ fēng zài náng zhōng , yě fèng yán le wǒ de zuì niè 。

मेरे अपराध छाप लगी हुई थैली में हैं, और तूने मेरे अधर्म को सी रखा है।

shān bēng biàn wèi wú yǒu ; pán shí nuó kāi yuán chù 。

“और निश्चय पहाड़ भी गिरते-गिरते नाश हो जाता है, और चट्टान अपने स्थान से हट जाती है;

shuǐ liú xiāo mó shí tou , suǒ liú yì de xǐ qù dì shàng de chén tǔ ; nǐ yě zhào yàng miè jué rén de zhǐ wàng 。

और पत्थर जल से घिस जाते हैं, और भूमि की धूलि उसकी बाढ़ से बहाई जाती है; उसी प्रकार तू मनुष्य की आशा को मिटा देता है।

使

nǐ gōng jī rén cháng cháng dé shèng , shǐ tā qù shì ; nǐ gǎi biàn tā de róng mào , jiào tā wǎng ér bù huí 。

तू सदा उस पर प्रबल होता, और वह जाता रहता है; तू उसका चेहरा बिगाड़कर उसे निकाल देता है।

tā ér zi dé zūn róng , tā yě bù zhī dào , jiàng wèi bēi , tā yě bù jué de 。

उसके पुत्रों की बड़ाई होती है, और यह उसे नहीं सूझता; और उनकी घटी होती है, परन्तु वह उनका हाल नहीं जानता।

dàn zhī shēn shàng téng tòng , xīn zhōng bēi āi 。

केवल उसकी अपनी देह को दुःख होता है; और केवल उसका अपना प्राण ही अन्दर ही अन्दर शोकित होता है।”

इस अध्याय पर स्वयं को परखें

10 शब्दों की त्वरित प्रश्नोत्तरी।