中文圣经

अय्यूब 6

ज्ञात 0/240

yuē bó huí dá shuō :

फिर अय्यूब ने उत्तर देकर कहा,

wéi yuàn wǒ de fán nǎo chēng yi chēng , wǒ yí qiè de zāi hài fàng zài tiān píng lǐ ;

“भला होता कि मेरा खेद तौला जाता, और मेरी सारी विपत्ति तराजू में रखी जाती!

xiàn jīn dōu bǐ hǎi shā gèng zhòng , suǒ yǐ wǒ de yán yǔ jí zào 。

क्योंकि वह समुद्र की रेत से भी भारी ठहरती; इसी कारण मेरी बातें उतावली से हुई हैं।

yīn quán néng zhě de jiàn shè rù wǒ shēn ; qí dú , wǒ de líng hē jìn le ; shén de jīng xià bǎi zhèn gōng jī wǒ 。

क्योंकि सर्वशक्तिमान के तीर मेरे अन्दर चुभे हैं6:4 सर्वशक्तिमान के तीर मेरे अन्दर चुभे हैं: अर्थात् मेरा कष्ट कम नहीं है। मेरी पीड़ा ऐसी है जैसी मनुष्य नहीं दे सकता।; और उनका विष मेरी आत्मा में पैठ गया है; परमेश्वर की भयंकर बात मेरे विरुद्ध पाँति बाँधे हैं।

yě lǘ yǒu cǎo qǐ néng jiào huàn ? niú yǒu liào qǐ néng hǒu jiào ?

जब जंगली गदहे को घास मिलती, तब क्या वह रेंकता है? और बैल चारा पाकर क्या डकारता है?

wù dàn ér wú yán qǐ kě chī ma ? dàn qīng yǒu shén me zī wèi ne ?

जो फीका है क्या वह बिना नमक खाया जाता है? क्या अण्डे की सफेदी में भी कुछ स्वाद होता है?

kàn wèi kě yàn de shí wù , wǒ xīn bù kěn āi jìn 。

जिन वस्तुओं को मैं छूना भी नहीं चाहता वही मानो मेरे लिये घिनौना आहार ठहरी हैं।

wéi yuàn wǒ dé zhe suǒ qiú de , yuàn shén cì wǒ suǒ qiè wàng de ;

“भला होता कि मुझे मुँह माँगा वर मिलता और जिस बात की मैं आशा करता हूँ वह परमेश्वर मुझे दे देता6:8 जिस बात की मैं आशा करता हूँ वह परमेश्वर मुझे दे देता: अर्थात् मृत्यु - वह उसकी आशा करता था, उसकी प्रतिक्षा करता था वह उस पल की अधीरता से बाट जोह रहा था।!

jiù shì yuàn shén bǎ wǒ yā suì , shēn shǒu jiāng wǒ jiǎn chú 。

कि परमेश्वर प्रसन्न होकर मुझे कुचल डालता, और हाथ बढ़ाकर मुझे काट डालता!

wǒ yīn méi yǒu wéi qì nà shèng zhě de yán yǔ , jiù réng yǐ cǐ wèi ān wèi , zài bù zhǐ xī de tòng kǔ zhōng hái kě yǒng yuè 。

यही मेरी शान्ति का कारण; वरन् भारी पीड़ा में भी मैं इस कारण से उछल पड़ता; क्योंकि मैंने उस पवित्र के वचनों का कभी इन्कार नहीं किया।

使使

wǒ yǒu shén me qì lì shǐ wǒ děng hòu ? wǒ yǒu shén me jié jú shǐ wǒ rěn nài ?

मुझ में बल ही क्या है कि मैं आशा रखूँ? और मेरा अन्त ही क्या होगा कि मैं धीरज धरूँ?

wǒ de qì lì qǐ shì shí tou de qì lì ? wǒ de ròu shēn qǐ shì tóng de ne ?

क्या मेरी दृढ़ता पत्थरों के समान है? क्या मेरा शरीर पीतल का है?

zài wǒ qǐ bú shì háo wú bāng zhù ma ? zhì huì qǐ bú shì cóng wǒ xīn zhōng gǎn chū jìng jìn ma ?

क्या मैं निराधार नहीं हूँ? क्या काम करने की शक्ति मुझसे दूर नहीं हो गई?

nà jiāng yào huī xīn 、 lí qì quán néng zhě 、 bú jìng wèi shén de rén , tā de péng yǒu dāng yǐ cí ài dài tā 。

“जो पड़ोसी पर कृपा नहीं करता वह सर्वशक्तिमान का भय मानना छोड़ देता है।

wǒ de dì xiong guǐ zhà , hǎo xiàng xī shuǐ , yòu xiàng xī shuǐ liú gān de hé dào 。

मेरे भाई नाले के समान विश्वासघाती हो गए हैं, वरन् उन नालों के समान जिनकी धार सूख जाती है;

zhè hé yīn jié bīng fā hēi , yǒu xuě cáng zài qí zhōng ;

और वे बर्फ के कारण काले से हो जाते हैं, और उनमें हिम छिपा रहता है।

便

tiān qì jiàn nuǎn jiù suí shí xiāo huà , rì tou yán rè biàn cóng yuán chù gān hé 。

परन्तु जब गरमी होने लगती तब उनकी धाराएँ लोप हो जाती हैं, और जब कड़ी धूप पड़ती है तब वे अपनी जगह से उड़ जाते हैं

jié bàn de kè lǚ lí qì dà dào , shùn hé piān xíng , dào huāng yě zhī dì sǐ wáng 。

वे घूमते-घूमते सूख जातीं, और सुनसान स्थान में बहकर नाश होती हैं।

tí mǎ jié bàn de kè lǚ zhān wàng ; shì bā tóng huǒ de rén děng hòu 。

तेमा के बंजारे देखते रहे और शेबा के काफिलेवालों ने उनका रास्ता देखा।

便

tā men yīn shī le pàn wàng jiù bào kuì , lái dào nà lǐ biàn méng xiū 。

वे लज्जित हुए क्योंकि उन्होंने भरोसा रखा था; और वहाँ पहुँचकर उनके मुँह सूख गए।

便

xiàn zài nǐ men zhèng shì zhè yàng , kàn jiàn jīng xià de shì biàn jù pà 。

उसी प्रकार अब तुम भी कुछ न रहे; मेरी विपत्ति देखकर तुम डर गए हो।

wǒ qǐ shuō : qǐng nǐ men gōng jǐ wǒ , cóng nǐ men de cái wù zhōng sòng lǐ wù gěi wǒ ?

क्या मैंने तुम से कहा था, ‘मुझे कुछ दो?’ या ‘अपनी सम्पत्ति में से मेरे लिये कुछ दो?’

qǐ shuō : zhěng jiù wǒ tuō lí dí rén de shǒu ma ? jiù shú wǒ tuō lí qiáng bào rén de shǒu ma ?

या ‘मुझे सतानेवाले के हाथ से बचाओ?’ या ‘उपद्रव करनेवालों के वश से छुड़ा लो?’

便使

qǐng nǐ men jiào dǎo wǒ , wǒ biàn bú zuò shēng ; shǐ wǒ míng bái zài hé shì shàng yǒu cuò 。

“मुझे शिक्षा दो और मैं चुप रहूँगा6:24 मुझे शिक्षा दो और मैं चुप रहूँगा: मुझे सच्चा निर्देश दो या मुझे मेरा कर्त्तव्य बोध कराओ तो मैं शान्त हो जाऊँगा।; और मुझे समझाओ कि मैंने किस बात में चूक की है।

zhèng zhí de yán yǔ lì liàng hé qí dà ! dàn nǐ men zé bèi shì zé bèi shén me ne ?

सच्चाई के वचनों में कितना प्रभाव होता है, परन्तु तुम्हारे विवाद से क्या लाभ होता है?

jué wàng rén de jiǎng lùn jì rán rú fēng , nǐ men hái xiǎng yào bó zhèng yán yǔ ma ?

क्या तुम बातें पकड़ने की कल्पना करते हो? निराश जन की बातें तो वायु के समान हैं।

nǐ men xiǎng wèi gū ér niān jiū , yǐ péng yǒu dāng huò wù 。

तुम अनाथों पर चिट्ठी डालते, और अपने मित्र को बेचकर लाभ उठानेवाले हो।

xiàn zài qǐng nǐ men kàn kàn wǒ , wǒ jué bù dāng miàn shuō huǎng 。

“इसलिए अब कृपा करके मुझे देखो; निश्चय मैं तुम्हारे सामने कदापि झूठ न बोलूँगा।

qǐng nǐ men zhuǎn yì , bú yào bù gōng ; qǐng zài zhuǎn yì , wǒ de shì yǒu lǐ 。

फिर कुछ अन्याय न होने पाए; फिर इस मुकद्दमे में मेरा धर्म ज्यों का त्यों बना है, मैं सत्य पर हूँ।

wǒ de shé shàng qǐ yǒu bú yì ma ? wǒ de kǒu lǐ qǐ bú biàn jiān è ma ?

क्या मेरे वचनों में कुछ कुटिलता है? क्या मैं दुष्टता नहीं पहचान सकता?

इस अध्याय पर स्वयं को परखें

10 शब्दों की त्वरित प्रश्नोत्तरी।